माताजी महारानी तपस्विनी

शिक्षा…..  शिक्षा वो अस्त्र है, जिसकी सहायता से हम हर कठिनाइयों का सामना कर सकते है। शिक्षा वो होती है जो हमें सही-गलत का भेद बताती है। शिक्षा मनुष्यों को सशक्त बनाती है और उन्हें जीवन की चुनौतियों का कुशलता से सामना करना सिखाती है। शिक्षा को विश्व स्तर पर मनुष्यों को सबल बनाने का सबसे प्रभावशाली साधन माना जाता है।

भारत में महिला शिक्षा के सबसे अहम समर्थकों में से एक थीं, महारानी तपस्विनी। महिलाओं को शिक्षित करने का उद्देश्य लेकर, माताजी महारानी तपस्विनी ने कोलकाता में महाकाली पाठशाला की स्थापना की थी ।

कौन थी रानी तपस्विनी?

रानी तपस्विनी, लक्ष्मी बाई की भतीजी तथा बेलुर के जमींदार नारायण राव की बेटी थीं। इनका जन्म 1835 में तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में हुआ था। महारानी तपस्विनी एक ब्राह्मण महिला थी, जिन्हें गंगाबाई  के नाम से भी जाना जाता था। वह संस्कृत भाषा और हिंदू धर्म से संबंधित पवित्र ग्रंथों में पारंगत थीं।

जब 1857 ईस्वी में क्रांति का युद्ध प्रारंभ हुआ, तब रानी तपस्विनी ने अपनी चाची के साथ इस क्रांति में सक्रिय रूप से भाग लिया। परन्तु क्रांति की विफलता के बाद उन्हें तिरुचिरापल्ली की जेल में रखा गया। बाद में वे नाना साहेब के साथ नेपाल चली गईं।

नेपाल पहुंचकर माताजी ने वहां बसे भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाई। नेपाल के प्रधान सेनापति की मदद से उन्होंने गोला-बारूद व विस्फोटक हथियार बनाने की एक फैक्टरी खोली ताकि क्रांतिकारीयों की मदद की जा सके। लेकिन एक मित्र ने धन के मोह में आकर अंग्रेजों को तपस्विनी के बारे में सब कुछ बता दिया। तब रानी तपस्विनी नेपाल छोड़कर कलकत्ता चली गईं।

रानी तपस्विनी का समाज के प्रति योगदान (महाकाली पाठशाला का गठन)

रानी का मानना था की शिक्षा ही जीवन को नयी दशा और दिशा दे सकती है। बिना शिक्षा के हम कुछ भी मुकाम हासिल नहीं कर सकते। उनका उद्देश्य लड़कियों और महिलाओं को शिक्षित करना था। इसीलिए वह 1890 में कोलकाता आईं और महाकाली पाठशाला की स्थापना की।

कलकत्ता में उन्होंने ‘महाकाली पाठशाला’ खोलकर बच्चों को राष्ट्रीयता की शिक्षा दी। 1897 ईस्वी में स्वामी विवेकानंद ने महाकाली पाठशाला का दौरा किया और महिला शिक्षा के विकास के लिए एक नया मार्ग स्थापित करने के लिए गंगाबाई के प्रयास की सराहना की। 1902 ईस्वी में बाल गंगाधर तिलक कलकत्ता आए तो उनकी माताजी से मुलाकात हुई।

महाकाली पाठशाला धार्मिक अध्ययन से जुड़े महत्व के कारण प्रमुखता से बढ़ता गया। महाकाली पाठशाला ने कलकत्ता विश्वविद्यालय के शैक्षिक प्राधिकरण से संबद्धता (Affiliation) प्राप्त की। बीसवीं सदी में इस स्कूल का अस्तित्व और लोकप्रियता बढ़ती गयी।

शिक्षा समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा ही हमारे ज्ञान का सृजन करती है। भारत सलाम करता है ऐसी वीरांगनाओं का जो अपनी अंतिम साँस तक देश के विकास के लिए लड़ती है। 

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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

CATEGORIES Business Agriculture Technology Environment Health Education

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