लोगों तक सस्ती इलाज पहुंचाने वाले देवकर की कहानी है प्रेरणादायी, 1.5 लाख का कर्ज लेकर लॉन्च किया हेल्थ सुविधा के लिए एप



महंगे इलाज और महंगी दवाईयां हर किसी के बस की बात नहीं होती। यही वजह है कि लोअर मीडिल क्लास के लोगों को अच्छे इलाज के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ जाता है। आम लोगों की इसी परेशानी को दूर करने का सपना देखा 15 साल की उम्र में सन्यास ले चुके, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सोनपैरी के रहने वाले देवकर साहेब ने। जिन्होंने Emergency Health Offer (EHO) नाम का ऐप तैयार किया है।

आज इस ऐप से छत्तीसगढ़ के 100 प्राइवेट अस्पताल जुड़े हैं। इस ऐप की मदद से टेली कंसल्टेशन, प्राइवेट अस्पताल में डायरेक्ट अपॉइंटमेंट, अफोर्डेबल प्राइस पर सर्जरी बुकिंग के साथ दवाइयों की सुविधा भी मिलती है।

शुरूआत नहीं थी आसान

32 वर्षीय देवकर साहेब सत्संग कार्यक्रमों के लिए छत्तीसगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड का दौरा करते थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि समाज में आज भी इतनी आर्थिक असमानता है कि अधिकतर लोग अच्छा इलाज नहीं ले पाते हैं। इन्हीं सबको देखते हुए उन्होंने उन्होंने हेल्थकेयर पर काम करने का फैसला किया।

देवकर ने एक बेवसाइट को इंटरव्यू देते वक्त कहा था, “मैंने धीरे-धीरे हेल्थ सेक्टर को समझना शुरू किया कि क्या-क्या समस्याएं हैं? इन्हें कैसे ठीक किया जा सकता है। मुझे पता चला कि अस्पतालों की भारी फीस के पीछे उनके विज्ञापन के खर्चे भी शामिल होते हैं।

2016 में हुई ‘परोपकार कार्ड’ की शुरुआत

देवकर ने बताया, ‘’इसके बाद मैंने 2016 के अंत में परोपकार कार्ड बनाया और पूरे छत्तीसगढ़ के 70 अस्पतालों को इससे जोड़ा। इसमें बहुत बड़े अस्पताल तो शामिल नहीं थे लेकिन वहां के सामान्य अस्पतों को इसमें शामिल किया गया था। हर परोपकार कार्ड 500 रुपये का रखा गया। वह एक साल के लिए वैलिड था। मैंने केवल 6 महीने में 11 हजार परिवारों तक अपने परोपकार कार्ड की पहुंच को सुनिश्चित किया।

देवकर के परोपकार कार्ड धारकों को उनके साथ जुड़ने अस्पतालों में 30 से 50 फीसदी तक की छूट दी जाती थी। उन्हें कई तरह से ऑपरेशनों में छूट होती थी। वहीं सरकारी अस्पतालों में लगभग सबकुछ फ्री इसलिए उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों के साथ टाइअप करना शुरू किया। वह कहते हैं कि लोगों के लिए 500 रुपये देना इसलिए मुश्किल नहीं था क्योंकि उन्हें हमारे टाइअप वाले अस्पतालों में कोई ओपीडी चार्ज नहीं भरना पड़ता था।

वे समाज के लिए एक बेहतर काम कर रहे हैं जो वाकई प्रेरणादायी है। आज उनसे जुड़कर कई लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ले पा रहे हैं।

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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

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