भारतीय महिला क्रिकेटर, हॉकी, टेनिस चैंपियन को तो सभी जानते हैं, पर क्या पता है कौन हैं भारत की बिलियडर्स, स्नूकर, पूल चैंपियन्स!

भारत में स्मृति मंधाना के चौके-छक्कों को तो सभी ने देखा होगा, भारतीय शटलर सायना नेहवाल और पी वी सिंधु ने तो दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। हॉकी की रानी और वंदना के हॉकी शॉट्स भी लोगों को याद होंगे। 

दरअसल तेजी से दुनियाभर में लगभग हर क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करते भारत के खिलाड़ियों की भी अब पहचान स्थापित हो गई है और खासकर महिला खिलाड़ियों की। पिछले एक दशक में महिलाओं ने बॉक्सिंग, क्रिकेट, हॉकी और बैडमिंटन जैसे सभी खेलों में अपना दमखम दिखाया है। पर क्या आप जानते हैं कि क्यू स्पोर्ट्स यानी कि बिलियर्ड्स, स्नूकर और पूल जैसे खेलों में भारतीय महिलाएं कम नहीं हैं। 

चलिए आज आपको बताते हैं कि कौन हैं भारत की स्टार क्यू स्पोर्ट्स (बिलियर्ड्स, स्नूकर और पूल) चैंपियन्स….

अरांता सांचेज (Arantxa Sanchis)

पुणे की रहने वाली भारतीय खिलाड़ी अरांता सांचेज का नाम स्पेन की दिग्गज टेनिस खिलाड़ी के नाम पर रखा गया है। पुणे की इस उभरती खिलाड़ी ने अपने से कहीं कद्दावर खिलाड़ियों को कई मैचों में मात दी है। 2008 में इंदौर में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में चार खिताब जीतकर उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड सेट किया था। महिला बिलियर्ड्स में दो राष्ट्रीय खिताब (2012, 2015) भी अरांता के नाम हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उनका खेल प्रदर्शन काबिले तारिफ है। 2013 में आयरलैंड में हुई विश्व स्नूकर चैंपियनशिप में उन्होंने विद्या पिल्लई के साथ मिलकर स्वर्ण पदक भारत के नाम किया था। पर उनकी राह आसान नहीं थी दरअसल वे लंबे समय से केरेटोकॉनस नाम की एक बीमारी से जूझ रही हैं। यह आंख की एक बीमारी है जिसकी वजह से देखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। 

इस खेल में नजर की जिस सटीकता की जरूरत पड़ती है उसे देखते हुए यह बीमारी उनके लिए एक बड़ी बाधा भी हो सकती थी। पर कहते हैं न कि अगर कुछ कर गुजरने का ज़ज्बा हो तो परेशानियां छोटी चीज है। सांचेज ने इस बीमारी का बहादुरी के साथ मुकाबला किया और इसे अपनी मंजिल के रास्ते में आने ही नहीं दिया।

उमादेवी नागराज

एडीलेड में हुए फाइनल में प्रतिद्वंदी खिलाड़ियों से भिड़ने वालीं रेवन्ना उमादेवी नागराज भी हैं | 2012 की बिलियर्ड्स और स्नूकर चैंपियनशिप विजेता उमादेवी के बारे में एक सबसे असाधारण बात यह भी है कि उन्होंने यह खेल तब खेलना शुरू किया जब ज्यादातर खिलाड़ी रिटायरमेंट की उम्र में होते हैं। 

30 साल की उम्र तक वे बेंगलुरु में रहने वाले किसी आम सरकारी कर्मचारी की तरह ही काम कर रही थीं। तब उन्हें टेबल टेनिस खेलने में रूचि थी। इसके लिए वे अक्सर शाम को कर्नाटक सरकार के सेक्रेटेरिएट क्लब में खेलने जाती थीं, लेकिन खेलने वाले लोग बहुत होते थे और और उन्हें कई बार अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ जाता था। इससे परेशान होकर उन्होंने नजदीक ही रखी बिलियर्ड्स टेबल की तरफ खेलना शुरू किया। फिर क्या था. इसके बाद तो उनकी जिंदगी ही बदल गई। उन्हें यह खेल उन्हें भा गया। 

उमादेवी ने नौकरी और घर-गृहस्थी की चुनौतियों के साथ बिलियर्ड्स में अपनी रूचि जारी रखी। जल्द ही एक के बाद एक खिताब जीतने भी शुरू कर दिए। 2009 में उन्हें अर्जुन पुरुस्कार मिला।

विद्या पिल्लई

इस खेल में एक और सितारा हैं विद्या पिल्लई, चेन्नई की विद्या आठ बार राष्ट्रीय स्नूकर चैंपियन रह चुकी हैं और उनका समर्थन खुद पंकज आडवाणी ने भी किया था। विद्या की उपलब्धियां सिर्फ राष्ट्रीय फलक तक ही नहीं हैं.। सांचेज के साथ जोड़ी बनाते हुए उन्होंने 2013 में हुई विश्व टीम स्नूकर चैंपियनशिप में संयुक्त रूप से स्वर्ण पदक हासिल किया था।
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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

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