PROPERTY MANAGEMENT: घर खरीदने से पहले रखें इन डॉक्यूमेंट्स का ख्याल, घर खऱीदने का सुरक्षित तरीका!

‘अपना घर’ हर इंसान के लिए ये किसी सपने से कम नहीं होता। एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए घर का सपना जिंदगीभर का सपना होता है। ऐसे में जब कोई अपने जीवनभर की कमाई को घर का आकार देता है तो उसे कई तरह के चरणों से होकर गुजरना होता है। जैसे बिल्डर या मकान को खोजना, उसकी विश्वसनीयता को परखना, और किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचना। इन सभी उलझनों में खरीददार के लिए प्रापर्टी खरीदना काफी परेशानियों से भरा होता है। इन स्थितियों में यह जान लेना काफी जरूरी होता है कि घर खरीदने से पहले किस तरह के दस्तावेज जरूरी होते हैं।

Title deeds

घर खरीदने से पहले प्रॉपर्टी के मालिकाना हक के बारे में सभी जानकारी ले लें। बेहतर रिसर्च कर लें। इसके लिए टाइटल डीड सबसे महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स में से एक है, जिसे घर या कुछ और खरीदने से पहले वैरिफाई (सत्यापित) किया जरूरी है। यह मालिक के अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में पूरी जानकारी देता है। इस डॉक्यूमेंट से यह भी पता चलता है कि स्वामित्व हस्तांतरण, विभाजन, रूपांतरण, म्यूटेशन जैसे विषयों पर कोई समस्या नहीं है।
इसके अलावा यह जानना भी जरूरी है कि जिस जमीन पर प्रॉपर्टी खड़ी है वह कानूनी रूप से खरीदी गई हो और निर्माण के लिए सभी जरूरी अनुमतियां ली गई हैं कि नहीं।

Liability certificate

मकान पर स्थानीय नगर निगम की ओर से टैक्स लगाया जाता है। इसलिए यह सत्यापित करना बेहद जरूरी है कि उस पर कोई बकाया न हो। इसके लिए खरीदार को देनदारी (एन्कम्ब्रन्स) सर्टिफिकेट की जांच करा लेनी चाहिए। इस प्रमाणपत्र से यह पता चलता है कि आपकी संपत्ति पर कोई मौद्रिक और कानूनी देनदारी बकाया नहीं है। यह उप-पंजीयक के कार्यालय से लिया जाता है। जहां संपत्ति पंजीकृत की गई है।

Commendation Certificate

यह कंस्ट्रक्शन क्लियरेंस सर्टिफिकेट के रूप में जाना जाता है। अगर आप किसी डेवलपर से फ्लैट, जमीन या घर जैसी कोई प्रॉपर्टी खरीद रहे हों, तब यह दस्तावेज जरूरी हो जाता है। इसमें यह पता चलता है कि स्थानीय अधिकारियों से जरूरी मंजूरी, लाइसेंस और अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हुआ है।

घर का लेआउट

लेआउट योजनाओं को सहीं योजना अधिकारियों से अनुमोदित करवाना जरूरी होता है। घर खरीदारों को सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि कई बार ऐसे मामले आते हैं कि डेवलपर्स ज्यादा मंजिलों को जोड़कर या खुले जगहों को कम करके अनुमोदित लेआउट से अलग हट गए हैं।

Occupancy certificate

इस दस्तावेज से यह प्रमाणित होता है कि संपत्ति का निर्माण प्रदान की गई अनुमतियों के अनुपालन में हुआ है। डेवलपर ने सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली होंगी।
तो अगर आप कहीं निवेश करने जा रहे हैं तो इन जरूरी डॉक्यूमेंट्स का पूरा ख्याल रखें और निवेश कर खुशियां खरीदें टेंशन नहीं।

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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

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