आर्गेनिक परफ्यूम का बिजनेस शुरू करने वाली 15 साल की आर्याही की कहानी!





Highlights:

• छोटीसी उम्र में शुरू किया बिज़नेस
• बच्चों के लिए फायदेमंद है ऑर्गेनिक परफ्यूम
• 100% केमिकल फ्री
• अब तक बेच चुकी हैं 200 से अधिक प्रोडक्ट

कुछ सीखने और कुछ बड़ा करने की कोई उम्र नहीं होती इसी बात को साबित किया है मुंबई की रहने वाली 15 साल की बच्ची आर्याही ने। उसने अपनी छोटी सी उम्र में कुछ ऐसा कर दिखाया जो बहुत कम लोग कर पाते हैं। आर्याही बच्चों के लिए ऑर्गेनिक परफ्यूम बनाती हैं जो बिलकुल केमिकल फ्री होता है । करीब दो-तीन महीने में ही आर्याही ने एक लाख से अधिक का बिजनेस किया है। आर्याही की मां रजनी अग्रवाल अपना एक स्कूल चलाती हैं। आर्याही धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में क्लास 9th की स्टूडेंट हैं।

कहां से आया आर्गेनिक परफ्यूम बनाने का यूनिक आइडिया

आर्याही कहती हैं, ‘मार्केट में उपलब्ध परफ्यूम केमिकल से बने होते हैं। यह हमारी बॉडी के लिए हार्मफुल होता है। मैं और मेरे दोस्तों को ये लगने लगा कि जो परफ्यूम हम खरीद रहे हैं, उसकी गंध बहुत हार्ड है या ये हमारे लिए महंगा है।’ तब आर्याही ने खुद परफ्यूम बनाने का सोचा। करीब 6 महीने तक उसने इस पर वर्क किया।कई परफ्यूम बनाने वाले स्टार्टअप, कंपनियों से बातचीत की। इसके बाद उसने बेला फ्रेगरेंस नाम से परफ्यूम बनाना शुरू किया। यह छोटे बच्चों के इस्तेमाल के लिए बेहतर है।

आर्याही बताती हैं कि जब उन्होंने इसे बनाना स्टार्ट किया तो कोई इसे सीरियसली ले ही नहीं रहा था। वो कहती हैं, लोग रॉ मटेरियल सप्लाई नहीं करना चाह रहे थे। उन्हें लग रहा था कि ये छोटी सी बच्ची क्या करेगी। कैसे अपना स्टार्टअप रन करेगी।

कौन कौन से आर्गेनिक परफ्यूम बनाती है आर्याही

आर्याही तीन तरह के परफ्यूम बनाती हैं। जिसका नाम उन्होंने बेला ऑर्गेनिक, बेला नेचुरल और बेला रोज रखा है। यह 100% केमिकल फ्री है।

केमिकल फ्री आर्गेनिक परफ्यूम

वह कहती हैं कि एसेंशियल ऑयल, फूड ग्रेड अल्कोहल और गुलाब से इसे तैयार किया जाता है। यह मार्केट के मुकाबले सस्ता भी है। अब तक वो 200 से अधिक प्रोडक्ट बेच चुकी हैं। सभी प्रोडक्ट्स उन्होंने ऑनलाइन ही बेचे हैं।
आर्याही की माँ रजनी कहती हैं, ‘माता-पिता को लगता है कि पढ़ाई के साथ-साथ दूसरी एक्टिविटी करने से स्टडी पर इंपैक्ट पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर बच्चे कुछ नया करने की कोशिश कर रहे हैं तो हमें उनका साथ देना चाहिए। जब आर्याही 11 साल की थी तो स्कूल में एक प्रोजेक्ट था, इसमें हर बच्चे को नया प्रोडक्ट बनाना था। आर्याही ने पुरानी स्कूल यूनिफॉर्म से पैड तैयार किए थे। आर्याही का मानना था कि पुरानी यूनिफॉर्म का हम इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसे कई लोग फेंक देते है। उसे बचपन से ही कुछ न कुछ करते रहने की चाहत रही है।’

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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

CATEGORIES Business Agriculture Technology Environment Health Education

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