भारत की पहली एंटी कोविड मेडिसिन 2 DG बनाने में DRDO को मिली सफलता


पिछले साल कोरोना संक्रमण के बाद से
ही भारतीय वैज्ञानिकों ने दवा बनाने की दिशा में कार्य शुरु कर दिया था। 2-
deoxy-D-glucose यही
नाम है भारत के पहले एंटी कोविड दवा का
यानी 2-डीजी नाम के
इस ऐंटी-कोविड ड्रग को डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (
DRDO) और डॉक्टर रेड्डीज के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ
सिंह और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इस दवा का पहला बैच (10,000 डोज) लॉच किया।
तो आइए सरल शब्दों में जानते हैं कि क्या है 2-डीजी दवा, कोविड के मात देने में ये
कितना ताकतवर है
? और कैसे कोविड मरीज इसका उपयोग कर पाएंगे साथ ही ये भी
जानेंगे की कोविड की लड़ाई में इस देसी दवा की भूमिका कितनी असरदार होगी ।

क्या है 2 डीजी दवा ?

दवा का पूरा नाम 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज
(2-
DG) है। DRDO की प्रयोगशाला INMAS द्वारा इसका एक एंटी-कोविड-19 चिकित्सकीय अनुप्रयोग विकसित किया गया है।
ये दवा कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन देने की निर्भरता को कम करती है, इससे कोरोना के
मरीजों को जल्दी रिकवर होने में सहायता मिलती है। डॉक्टर्स के अनुसार
जिन मरीजों पर इसका प्रयोग किया
गया उन्हें 3 दिन बाद ही अलग से ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखने की जरूरत नहीं पड़ी। लगभग
आधा प्रतिशत मरीज तीन से सात दिन में कोरोना संक्रमण से ठीक हुए और 11 से 12 दिन
में ही रिकवरी की दर शत्-प्रतिशत मरीजों की संख्या में पाई गई है ।

2-डीजी
दवा काम कैसे करेगी ?

यह दवा ग्लूकोज का एक सब्स्टिट्यूट
है। कोरोना वायरस अपनी एनर्जी के लिए मरीज के शरीर से ग्लूकोज लेता है, लेकिन
ग्लूकोज के धोखे में वह इस दवा का इस्तेमाल करने लगता है
जिसकी वजह से वायरस को एनर्जी
मिलना बंद हो जाता है और उनका वायरल सिंथेसिस खत्म होने लगता है। इस तरह नए वायरस
का बनना रूक जाता है और बाकी वायरस भी मरने लगते हैं। डीआरडीओ के अनुसार 2-डीजी
दवा वायरस से संक्रमित मरीज की कोशिका में जमा हो जाती है और उसको ज्यादा बढ़ने से
रोकती है। संक्रमित कोशिका के साथ मिलकर यह एक तरह से सुरक्षा की दीवार बना देती
है। इससे वायरस उस कोशिका के साथ किसी और हिस्से में नहीं फैल पाता।

तीन
ट्रायल के बाद मिली सफलता

अप्रैल 2020 में महामारी की पहली
लहर के दौरान
INMAS और DRDO के वैज्ञानिकों ने सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी)
हैदराबाद की मदद से प्रयोगशाला परीक्षण किए और पाया कि यह दवा सार्स-सीओवी-2 वायरस
के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करती है। और वायरल को बढ़ने से रोकती है
इन परिणामों के आधार पर ड्रग्स
कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन
(सीडीएससीओ) ने मई 2020 में कोविड-19 रोगियों में 2-डीजी के चरण-2 के नैदानिक
परीक्षण की अनुमति दी थी। अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक इस दवा के 3 क्लीनिकल
ट्रायल हुए जिसके बाद इस दवा के आपात उपयोग को मंजूरी दी गई।

कब कर
पाएंगे आप दवा का उपयोग ?

भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने डीआरडीओ
द्वारा विकसित कोविड के दवा के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। उम्मीद की
जा रही है कि ये दवा अगले कुछ हफ्तों में मिलनी शुरू हो जाएगी।

कैसे
होगा दवा का उपयोग ?

एक सैशे में पाउडर के रूप में यह
दवा मिलेगी जिसे पानी में घोलकर लिया जाएगा। डीआरडीओ के अनुसार कोरोना मरीज को
रोजाना 2 डोज सुबह और 2 डोज शाम को लेना होगा
। आसान शब्दों में कहें तो इसे ग्लूकोज
की तरह की इस्तेमाल किया जा सकेगा।

भारत में आसानी से होगा 2-डीजी का
उत्पादन

2-DG (2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज) को मध्यम से गंभीर लक्षण वाले कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रयोग किया
जा सकता है। डीआरडीओ ने कहा है कि एक सामान्य अणु और ग्लूकोज के एनालॉग से इसे
तैयार किया है। इसकी वजह से इसका आसानी से उत्पादन हो सकेगा। 

कोरोना की दूसरी लहर भारत के लिए काफी
नुकसानदायी रही। पूरा सिस्टम वैक्सीन और स्वास्थ्य सुविधाओं की पूर्ति में लगा है।
लेकन समस्या भारत बड़ी आबादी के साथ रिमोट एरिया में कम जागरूकता और स्वास्थ्य
सुविधाओं का अभाव है । ऐसी स्थिति में 2-डीजी दवा एक उम्मीद की किरण है। इसका
आसानी से उत्पादन, उपयोग और कम कीमत भारत को महामारी से लड़ने में काफी मदद करेगा
। 

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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

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