Positivity: अपने अंदर की ऊर्जा के इस्तेमाल से डर का करें सामना!



दिन की शुरूआत को लेकर कई लोगों की ये राय होती है कि सकारात्मक ऊर्जा को महसूस करते हुए अपने दिन की शुरुआत करनी चाहिए। इसके लिए आप हर जगह दिन के पॉजिटिव कोट्स भी देखे होंगे। पर जब सिचुएशन बुरी आती है तब लगता है कि कैसे इससे पार पाया जाए। दरअसल सकारात्मकता पर बात करने वाले एक्सपर्ट्स और अच्छी किताबों में सबसे पहला अंश यही होता है कि आप अगर किसी भी दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं तो सबसे पहले आपके अपने अंदर के डर को खत्म करना होगा। डर किसी भी चीज का हो सकता है, जैसे पहला कदम उठाने का डर, हार जाने का डर, कुछ खोने का डर, लोगों का डर। पर अगर आप सच में आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपको अपने डर से सामना करना होगा। इस छोटे से लेख के जरिए हम आपको, आपके डर से सामना करने के कुछ स्टेप्स बता रहे हैं, जो विशेषज्ञों की सलाह, कुछ किताबें और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं…

अपने अंदर के डर को खत्म करें

एक प्रसिद्ध किताब (नो फियर ऑफ फेल्योर) में लिखा है कि अपने अंदर के डर को खत्म करना होगा, डर से जीतना होगा और यह तभी हो सकता है जब आप धीरे-धीरे कदम बढ़ाएंगे। आपको ये नहीं सोचना है कि सफल होंगे या फिर असफल। आपको सिर्फ अपना बेस्ट देना है। काम की शुरुआत करके ही आप अपने डर को खत्म कर सकते हैं। आगे बढ़कर शुरुआत नहीं की, तो कुछ सालों बाद भी खुद को वहीं पाएंगे जहां आप अभी खड़े हैं।

स्ट्रेस मैनेजमेंट नामक एक किताब के कुछ अंश हैं कि चिंता बेहतर निर्णय लेने में मदद तो करती है लेकिन चिंताएं सॉल्यूशन-फोकस्ड होनी चाहिए। इससे आपके असफल होने की संभावना में कमी दिखाई देती है। चिंता को इन प्रश्नों के दम पर दिशा दें- जिसपर भरोसा है, क्या वह वाकई भरोसेमंद है? उसकी सीमाएं क्या हैं? ब्लाइंड स्पॉट्स देखने के लिए क्या व्यवस्था है? हमें समस्या को पहचानकर सतर्क रहना चाहिए।

छोटे-छोटे कामों से तय करें मंजिल

सफलता महत्वपूर्ण कामों को करके ही हासिल की जा सकती है न कि गैरजरूरी कामों से। ये सबसे महत्वपूर्ण है कि आपकी प्राथमिकताएं तय हो और अपना टाइम गैरजरूरी कामों में न गवाएं। लोगों के पास सपने तो बड़े होते हैं लेकिन वो अपना पूरा फोकस और समय छोटे कामों को करने में ही खराब कर देते हैं। जो अपनी असफलता के लिए समय का बहाना बनाते हैं, वो खुद को धोखे में रखते हैं।

क्षमता के अनुसार तय करें लक्ष्य

ये बात एकदम सच है कि, आप गोल्स सेट करते हैं यानी कि आप लक्ष्यों को पाने में सक्षम हैं। लेकिन कभी-कभी आप अतिउत्साह में समय के हिसाब से ज्यादा गोल्स तय कर लेते हैं। याद रखें कि गोल्स पूरा होने में जो खुशी और आत्मविश्वास मिलती है, वही आपको आगे बढ़ने में मदद करती है। इसीलिए गोल्स को पूरा करने के लिए गोल्स सेट करें।

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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

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