Positivity: जानें वैचारिक मतभेद के बीच भी कैसे लीडर्स करते हैं बेहतर परफॉर्म, असहमति जताना भी है एक कला !



Positivity: आमतौर पर ऐसा कहा जाता है कि तनाव या किसी बड़े काम को संभालने के माहौल में कई बार वैचारिक मतभेद आम होते हैं, लेकिन क्या इसका असर हमारे काम पर पड़ना चाहिए। Positivity के इस लेख के जरिए हम आपको आज ये बता रहे हैं कि कैसे बड़े लीडर्स हर स्थिति में सकारात्मक रहकर काम करते हैं। अगर किसी काम को लेकर वे असहमत हैं तो जरूरी नहीं है कि वे किसी को नाराज करें। बल्कि असहमति जताने के बाद भी एक अच्छे लीडर की उनका पूरा साथ देती है, भले ही उनसे ज्यादातर लोगों के वैचारिक मतभेद क्यों ही न हो….

हर माहौल में सकारात्मक रहना किसी साधना से कम नहीं है। ये वो गुण है जिससे आप अपने आस-पास को माहौल को अकेले ही हर स्थिति में सकारात्मक एनर्जी दे सकते हैं। किसी भी अच्छे संस्थान को ऐसे लीडर्स और कर्मचारियों की जरूरत होती है जो पूरी डिप्लोमेसी के साथ प्रोडक्टिव बातचीत करने की कला में माहिर हों, फिर चाहे विचारों में कितना ही मतभेद क्यों ना हो। जब हम दूसरों की बात सुनने-समझने के लिए खुला दिमाग रखते हैं, उनके विचारों का सम्मान करते हैं तो उन्हें हर तरह से प्रेरित करने में सफल होते हैं। अगर वैचारिक मतभेद के दौरान किसी बात पर अपनी असहमति जताना चाहते हैं, तो उसके लिए ये तरीके अपना सकते हैं…

अपने विचारों और उसके फायदे से लोगों को अवगत कराएं

एक अच्छा टीम लीडर हर किसी के विचारों का सम्मान करता है। ‘अपने विचार व्यक्त करने के लिए बहुत धन्यवाद।’, ऐसा कहकर एक अच्छा लीडर उन्हें सम्मानित कर सकता है। ऐसा कर सामने वाले को यह संदेश जाता है कि उनका नजरिया आपके लिए महत्वपूर्ण है, साथ ही यह सामने वाले पर लीडर के भरोसे को दर्शाता है फिर चाहे मन ही मन उससे किसी तरह की असहमति क्यों ही न हो। धन्यवाद कहने से व्यक्ति खास महसूस करता है। इस तरह आप आगे संवाद के लिए रास्ता खोलना आसान हो जाता है। ऐसा व्यवहार सही प्रतिक्रिया देता है।

तीखे शब्दों से बचें, विनम्रता अपनाएं

किसी भी बात को कहने से पहले अपने शब्दों का सही चयन जरुर करें। नाराजगी या असहमति जाहिर करने के लिए जब विनम्रता भरे शब्द स्थिति को सुधार सकते हैं। वहीं जब आप कड़वें शब्दों का इस्तेमाल कर मौके को हाथ से निकल जाने देते हैं। जो वाक्य सुनने में कट्टर लगें उनसे एहतियात रखें।

बहस के दौरान सकारात्मक रवैया अपनाएं

वैचारिक मतभेद बढ़ने से माहौल खराब हो सकता है। इसलिए किसी बहस के दौरान भी सकारात्मक रहें। आपक बॉडी लैंग्वेज से ये नहीं जाहिर होना चाहिए कि आप किसी को अपमानित कर रहे हैं। आपके व्यवहार से ये झलकना चाहिए कि आप सामने वाले के विचारों का सम्मान करते हैं।

मोरल वैल्यूज को न भूलें

किसी भी बहस में केवल आपसी असहमति वाले मुद्दे पर फोकस करना बेहद आसान होता है। इस दौरान चाहे लोग पूरे जुनून के साथ अपनी असहमति जताते रहें पर उनमें कुछ तो ऐसी मान्यताएं या कुछ ऐसे संस्कार होते ही हैं जो सभी में एक जैसे होते हैं। उन मान्यताओं को और उनके विश्वास को सबके सामने लेकर आने से आपस की दूरियां काफी हद तक कम हो सकती हैं।

ये लेख मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। अगर आपको पॉजिटिविटी (Positivity) पसंद आए तो आप हमसे ईमेल के जरिए जुड़कर अपना फीडबैक भी दे सकते हैं। विभिन्न सोशल मीडिया पर भी आप हमसे जुड़ सकते हैं।

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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

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