इसे कहा जाता है सफेद सोना, फ्रीडम मूवमेंट से भी है रिश्ता, जानें क्यों है ये इतना खास!

सफेद सोना यानी कि कॉटन, जिसे सूती का कपड़ा कहते हैं। ये जिनता आरामदायक होता है उतना ही एलिगेंट लुक भी देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं ये स्किन केयर के लिए भी परफेक्ट है। दुनियाभर में भारत में सबसे ज्यादा कपास या सूती का प्रोडक्शन होता है। कपास के सबसे उत्पादक होने के साथ-साथ भारतीय इसके सबसे बड़े कंज्यूमर भी हैं। कपास ने भारतीय स्वदेशी आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

कपास के बारे में…

कपास को सफेद सोना इसलिए कहते हैं क्योंकि इसकी काफी उपयोगिता है। आम भाषा में कॉटन और रुई भी कहा जाता है। इससे उम्दा क्वालिटी के कपड़े बनाए जाते हैं, जो स्किन के लिए बेस्ट प्रोटेक्शन का काम करता है। 

कपास को फसलों के द्वारा प्राप्त किया जाता है, ये एक झाड़ीदार पौधा होता है, जिसकी पत्तियों का आकार हमारे हाथ के पंजों की तरह ही दिखाई देता है। इसके फल सफेद रंग के होते हैं, जिनके पकने के बाद इनमें से रुई निकाली जाती है। इसकी जड़ बाहर से पीले और अन्दर से सफेद रंग की होती है। इसके फूल और फल सर्दी से गर्मी के बीच लगाए जाते हैं। 

इन चीजों में होता है इस्तेमाल 

रुई बनाने में

सूती कपड़ों में

फिशनेट

कॉफी फिल्टर

टेंट

बुक बाइंडिंग

मोटा कागज

औषधीय गुणों से भरपूर 

कपास के पौधे में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों में शुगर, प्रोटीन, फास्फोरस, कैल्शियम, आयरन, ऑइल, कॉपर, विटामिन A, B, C, D, E पाए जाते हैं। कपास से सूती फाइबर  बनते हैं। जो नरम और आरामदायक होते हैं। सूती कपड़े या नेचुरल फैब्रिक हर मौसम में इस्तेमाल के लिए  उपयोगी होते हैं। कपास का इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज में भी होता है। आयुर्वेद में कपास की जड़, तने की छाल, पत्ता, फूल तथा बीज का इस्तेमाल औषधि के लिए किया जाता है। 

सूती कपड़े में हाइपोलेरगेनिक भी पाए जाते हैं यही वजह है कि सूती कपड़े पहनने पर स्किन में नमी बनी रहती है। साथ ही बाहर की हवा से भी ये सुरक्षा देता है। 

इसके अलावा किचन में खाना बनाते समय और लैब में काम करते समय सूती कपड़े या एप्रन पहना जाता है, क्योंकि आग पकड़ने पर कॉटन राख हो जाता है और शरीर पर चिपकता नहीं।

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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

CATEGORIES Business Agriculture Technology Environment Health Education

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