75 years of independence: देश मना रहा है आज़ादी का अमृत महोत्सव, पर क्या जानते हैं आज़ादी के 10 अनसुने किस्से!



भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। 15 अगस्त 1947 का दिन भारतीय इतिहास का कभी नहीं भूलने वाला दिन है। इस दिन ब्रिटेन की गुलामी से भारत आज़ाद हुआ था। आज भारत को आज़ाद हुए 75 साल हो गए। और आज भारत दुनिया के उन देशों से साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है जो विकास के नए कीर्तिमान रच रहे हैं। लेकिन ये आज़ादी हमें ऐसे ही नहीं मिली। वर्षों का संघर्ष, बलिदान हमारी कहानी का हिस्सा है। ऐसे में हमारी स्वतंत्रता के साथ कई अनसुने अनकहे किस्से हैं। जानते हैं ऐसी 10 अनसुनी कहानी…


कहानी-1 ब्रिटेन ने सन् 1947 में भारत को आजाद करने का फैसला किया था। दरअसल 1940 के दशक में हो रहे जबरदस्त आंदोलन ब्रिटिश सरकार पर दबाव बना कायम कर रहे थे और साथ ही दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन खुद भी काफी कमजोर हुआ था। यही कारण है कि 1947 में ब्रिटेन ने भारत को आजाद करने का फैसला किया।

कहानी-2 ब्रिटेन की लेबर पार्टी ने 1945 में हुए चुनावों में इस बात का वादा किया था कि वह भारत और उसके अलावा दूसरी ब्रिटिश कॉलोनियों को आज़ाद कर देंगी। जीत के बाद लेबर पार्टी के प्रधानमंत्री Clement Attlee ने यह घोषणा की, कि जून 1948 तक भारत को पूर्ण स्वराज दिया जाएगा।

कहानी-3 फरवरी 1947 में लार्ड माउंटबेटन को भारत के अंतिम वायसरॉय के पद पर नियुक्त किया गया, ताकि वे सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करवा सकें। पहले आजादी 1948 में होने वाली थी लेकिन भारत में बढ़ रहे सांप्रदायिक तनाव के को देखते हुए उन्होंने आजादी को अगस्त 1947 में ही देने का फैसला लिया।

कहानी-4 3 जून 1947 में लार्ड माउंटबेटन के साथ हुई मीटिंग में भारत की आजादी को लेकर दो बड़े फैसले किए गए। पहला भारत के बंटवारे को लेकर जिसके तहत भारत को दो हिस्सों, भारत और पाकिस्तान में बांटा गया और दूसरा कि सत्ता के हस्तांतरण 15 अगस्त 1947 को होगा। इसे ही “June 3 Mountbatten plan” भी कहा गया है।

कहानी-5 भारत के आखिरी वायसरॉय लार्ड माउंटबेटन एक टोटका मानते थे, दरअसल 15 अगस्त की तारीख को वे खुद के लिए अच्छा मानते थे। इसके पीछे कारण था कि 15 अगस्त 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान की आर्मी ने उनकी फौज के आगे समर्पण कर दिया था।

कहानी-6 जिस समय भारत 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि को आज़ादी का जश्न मना रहा था। उस वक्त आजादी के आंदोलन के सबसे बड़े प्रतिनिधि महात्मा गांधी वहां शामिल नहीं हुए। गांधी बंटवारे के फैसले से आहत थे। उन्होंने बंटवारे की वजह से हो रहे साम्प्रदायिक दंगों और तनाव को रोकने के लिए कलकत्ता में अनशन किया।

कहानी-7 15 अगस्त 1947 की सुबह 8.30 बजे वाइसरीगल लॉज, जो अब राष्ट्रपति भवन है। वहां आज़ाद भारत की पहली सरकार के लिए शपथ ग्रहण समारोह की शुरूआत हुई। भारत के पहले प्रधानमंत्री ने 10.30 बजे काउंसिल हाउस के ऊपर तिरंगा फहराया।

कहानी-8 कहते हैं कि 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को आजादी मिलने के लगभग 20 मिनट बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु और पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद लार्ड माउंटबेटन के पास गए। उन्होंने माउंटबेटन को देश के पहले गवर्नर जनरल बनने का न्योता दिया। साथ ही पंडित नेहरू ने लार्ड माउंटबेटन को एक लिफाफा थमाया जिसमें पहली कैबिनेट मंत्रियों की सूची सौंपी गई थी। जब वो लिफाफा खोला गया तो उसमें कुछ नहीं था वह लिफाफा खाली था। लेकिन शपथ ग्रहण समारोह तक गुम हुई लिस्ट को खोज लिया गया।

कहानी-9 भारत का झंडा पहली बार 7 अगस्त 1906 को कलकत्ता के Parsee Bagan Square में फहराया गया। उस वक्त झंडे के सबसे ऊपर लाल पट्टी थी जिस पर 8 कमल थे। नीचे हरी पट्टी पर बाईं तरफ सफेद रंग का सूरज था और दाईं तरफ चांद और तारा बना हुआ था।

कहानी-10 15 अगस्त 1947 को जब भारत आज़ाद हुआ तब भारत के पास कोई राष्ट्रगान नहीं था। वंदे मातरम के साथ स्वतंत्रता का स्वागत किया गया इसके साथ ही आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने देश को संबोधित भी किया।
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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

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