DRDO की 2-DG दवा से कोरोना को मात देगा भारत

एक प्रसिद्ध वाक्य है ‘जहां चाह वहां राह’ और इसी बात को चरितार्थ कर रहे हैं हमारे भारतीय वैज्ञानिक । उनकी दिनरात की मेहनत और लगन ने आखिर उन्हें परिणाम तक पहुंचा ही दिया । दरअसल DRDO की कोरोना रोधी दवा 2-DG (2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज) को कोरोना के इलाज के लिए DCGCI से आपात मंजूरी मिल चुकी है । वैज्ञानिकों ने इस बात को प्रूफ किया है कि यह शरीर में वायरस को बढ़ने से रोकने में कारगार है । वर्तमान परिस्थितियों में जहां भारत बड़ीं आबादी और वैक्सीन की कमी जैसे परेशानियों का सामना कर रहा है ऐसे में ये दवा कोरोना से लड़ने सहायक होगी । 

कैसे काम करेगी दवा
इसे पाउडर के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा मरीज इसका उपयोग पानी में घोलकर कर सकेंगे । डीआरडीओ के अनुसार 2-डीजी दवा वायरस से संक्रमित मरीज की कोशिका में जमा हो जाती है और उसको बढ़ने से रोकती है। संक्रमित कोशिका के साथ मिलकर यह एक तरह से सुरक्षा की दीवार बना देती है। इससे वायरस उस कोशिका के साथ ही अन्य हिस्से में भी नहीं फैल पाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि वायरस को शरीर में ग्लूकोज न मिले तो उसकी वृद्धि रुक जाएगी। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों का कहना है कि 2020 में ही कोरोना की इस दवा को बनाने का काम शुरू किया गया था। हैदराबाद में इस दवा की टेस्टिंग की गई थी।
आसान शब्दों में समझते हैं 2-DG दवा का गणित
वायरस के विकास के लिए ग्लूकोज का होना जरूरी है। यदि उसे ग्लूकोज नहीं मिलेगा तो उसका विकास नहीं हो सकेगा। कोशिका से चिपकी इस दवा को वायरस ग्लूकोज समझ कर खाने की कोशिश करेगा, लेकिन ये ग्लूकोज नहीं है, इसलिए इसे खाने से वायरस का खात्मा हो जाएगा और मरीज ठीक होने लगेंगे । 

आसानी से होगा उत्पादन
2-DG (2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज) को मध्यम से गंभीर लक्षण वाले कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रयोग किया जा सकता है। डीआरडीओ ने कहा है कि एक सामान्य अणु और ग्लूकोज के एनालॉग से इसे तैयार किया है। इसकी वजह से इसका आसानी से उत्पादन हो सकेगा। औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने इस दवा के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। 
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसे डीआरडीओ द्वारा हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के साथ मिलकर विकसित की गई है । क्लिनिकल परीक्षण से बात से यहा बात साफ हो गई है कि 2-डीजी दवा अस्पताल में भर्ती मरीजों के तेजी से ठीक होने में मदद करती है और अतिरिक्त ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करती है ।
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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

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