MSMEs को बढ़ावा देने सरकार की पहल, नॉन-टैक्स बेनिफिट्स में हुआ बड़ा बदलाव



MSMEs: रजिस्टर्ड पंजीकृत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) 3 साल के लिए रिक्लासिफिकेशन के बाद अपनी संबंधित श्रेणियों में सभी गैर-कर लाभ प्राप्त को जारी रख सकेंगे। इससे पहले यह अवधि 1 वर्ष ही थी। जिसे बढ़ाने का फैसला लेते हुए सूक्ष्म , लघु एवं मध्यकम उद्यम मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। गैर-कर लाभों में सार्वजनिक खरीद नीति और विलंबित भुगतान सहित सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभ हैं। एमएसएमई मंत्रालय (Ministry of MSME) ने सूचना जारी कर कहा है कि कि संयंत्र व मशीनरी या उपकरण या टर्नओवर या दोनों में और परिणामी पुनर्वर्गीकरण में निवेश की शर्तों में अपवार्ड चेंजेस के मामले में एक उद्यम उस श्रेणी के सभी गैर-कर लाभ जारी रहेंगे। जिसमें वह रिक्लासिफिकेशन के पहले था। यह बदलाव की तिथि से तीन साल की अवधि के लिए है।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल

सरकार ने यह निर्णय एमएसएमई हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद लिया और यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप ही काम करेगा।

बता दें 93 हजार 48 माइक्रो एंटरप्राइजेस तैयार हो चुके हैं, स्मॉल एंटरप्राइजेस संसद के मानसून सत्र में एमएसएमई राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह ने कुछ आंकड़े शेयर कर जानकारी दी थी। इन आंकड़ों के मुताबिक, देश में 6.3 करोड़ एमएसएमई में से 93048 माइक्रो एंटरप्राइजेस, जुलाई 2020 से जुलाई 2022 के बीच स्मॉल एंटरप्राइजेस में बदले थे। दूसरी ओर 10,141 स्मॉल एंटरप्राइजेस ऐसे हैं, जो इसी अवधि में मीडियम बिजनेस कैटेगरी में चले गए थे।

सरकार ने साल 2020 में एमएसएमई की परिभाषा में कुछ चेंजेस किए है, नई परिभाषा के तहत अब 1 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली और 5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाली इकाइयां माइक्रो सेगमेंट में आएगी। इसी तरह 10 करोड़ रुपये तक के निवेश और 50 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियां स्मॉल बिजनेस में आती हैं। अब 50 करोड़ रुपये तक के निवेश और 250 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाली यूनिट्स, मीडियम एंटरप्राइजेस के अंतर्गत आती है।

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Dr. Kirti Sisodhia

Content Writer

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